डॉ. राजकला देशवाल को मिला 'पंडित लखमीचन्द सम्मान', मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
सोनीपत।
हिन्दी साहित्य और हरियाणवीं लोकसाहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए सोनीपत की प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राजकला देशवाल को हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के प्रतिष्ठित 'पंडित लखमीचन्द सम्मान' से सम्मानित किया गया। सम्मान के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें सम्मान-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किया।
यह सम्मान समारोह लखमीचन्द प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय, रोहतक तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित किया गया। समारोह में मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अमित आर्य, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अकादमी के निदेशक, साहित्यकार और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डॉ. राजकला देशवाल अब तक 12 चर्चित पुस्तकों की रचना कर चुकी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में लोक साहित्य के विविध आयाम, लोकगीतों में नारी विमर्श, हरियाणा के लोकसाहित्य की अस्फुट विधाएं, नारी वेदना के विविध रूप, लाड़ कोथली, यादों के दायरे, मन तरंगों की नाव में, स्त्री मन की परतें, उजली राहें, महाकवि सूरदास के आराध्य कृष्ण तथा पंडित लखमीचन्द के काव्य में सामाजिक सरोकार शामिल हैं। इन रचनाओं के माध्यम से उन्होंने हिन्दी और हरियाणवी लोकसाहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
डॉ. राजकला देशवाल इससे पूर्व सूर शोधार्थी सम्मान, श्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार, बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य पुरस्कार, बीबी इकबाल कौर स्मृति साहित्य सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, हिन्दी सहस्राब्दी सम्मान और श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं।
राजकीय महिला महाविद्यालय, मुरथल में हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं कार्यवाहक प्राचार्या के पद से
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने स्वयं को पूर्णकालिक साहित्य सृजन के लिए समर्पित किया और लगातार 12 पुस्तकों का लेखन कर साहित्य जगत में विशेष स्थान बनाया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. राजकला देशवाल पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार डॉ. सन्तराम देशवाल की सहधर्मिणी हैं।
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