एनएचएआई के अधिकारियों की वादाखिलाफी की वजह से बन रहे टकराव के आसार : रतनमान
अनिल खत्री / करनाल ।
करनाल में निर्माणाधीन रिंग रोड पर लिखित समझौते के मुताबिक सर्विस लेन न बनाए जाने से नाराज किसानों का धरना शनिवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर गया। धरने की अध्यक्षता वयोवृद्ध किसान नेता सलामुदीन शेखपुरा जागीर ने की। शुक्रवार को ग्रामीणों ने रिंग रोड के निर्माण कार्य को पूरी तरह रुकवाकर अनिश्चितकालीन पक्का मोर्चा लगाकर धरने की शुरुआत कर दी थी। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे। जिन्होंने एनएचएआई और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर अपनी आवाज को बुलंद किया। आंदोलित किसानों ने निर्माणाधीन रिंग रोड पर प्रदर्शन करते हुए चेताया कि अगर एनएचएआई के अधिकारियों ने समझौता लागू नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे।
शनिवार को धरनास्थल पर पहुंचकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने आंदोलनकारी ग्रामीणों और किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। लिखित समझौता होने के बाद भी प्रशासन और एनएचएआई द्वारा वादों को पूरा नहीं किया जा रहा है। जिससे मजबूर होकर किसानों द्वारा को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड रहा है। धरनास्थल पर उपस्थित आंदोलनकारी किसानों को संबोधित करते हुए रतनमान ने शासन व प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक समझौते के अनुसार सर्विस लेन का निर्माण नहीं किया गया तो तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रतनमान ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा यदि बार-बार झूठे आश्वासन देकर लोगों को गुमराह किया जाता रहा तो ऐसी स्थिति में लोगों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। किसानों ने अपनी आवाज को बुलंद करते हुए सरकार को सामूहिक तौर पर चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके साथ-साथ हल्ला बोल आंदोलन भी किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द सामूहिक बैठक बुलाकर इस समस्या का समाधान किया जाए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से पक्का मोर्चा किसानों द्वारा शुरू कर दिया गया है और किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलन का नेतृत्व भाकियू द्वारा किया जा रहा है।
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि यह आंदोलन मजबूरी में किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान और ग्रामीण टकराव नहीं चाहते हैं। लेकिन बार-बार किए गए लिखित समझौतों को संबंधित अधिकारियों द्वारा तोड़ा जा रहा है। जोकि सही नहीं है। एनएचएआई और प्रशासन की लापरवाही से हालात बिगड़ सकते हैं। सरकार और प्रशासन को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और किसान किसी भी हालत में अपने हक से पीछे नहीं हटेंगे।
चौधरी देवीलाल के लाडले हुए मायूस
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि हरियाणा में हजारों वृद्धजनों की पेंशन काटे जाने से बुजुर्ग बेहद मायूस हैं। उन्हें अब स्व. चौधरी देवीलाल की याद सताने लगी है। उन्होंने कहा कि चौधरी देवीलाल ने वृद्धों का सम्मान करते हुए अपने शासनकाल में वृद्धों के लिए बुढापा सम्मान भत्ता लागू किया था। अब पेंशन कटने से वृद्धजन आर्थिक और मानसिक संकट में आ गए हैं। रतनमान ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने बिना किसी आर्थिक शर्त के पेंशन व्यवस्था लागू की थी। ताकि बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले। आज प्रदेश के बुजुर्गों को उनकी नीतियों की याद आने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बेवजह वृद्धजनों को परेशान कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि काटी गई पेंशन तुरंत बहाल की जाए। अन्यथा भारतीय किसान यूनियन द्वारा जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
9 को करनाल किसान भवन में होगी जिला स्तरीय पंचायत
इस बीच भाकियू के प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में खत्म की गई हजारों बुजुर्गों की बुढ़ापा पेंशन के मुद्दे सहित आने वाली 9 फरवरी को किसान भवन करनाल में चर्चा की जाएगी और आंदोलन की नई रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने सभी भाकियू पदाधिकारियों तथा पेंशन खत्म किए जाने से प्रभावित बुजुर्गो को किसान पंचायत में पहुंचने की अपील भी की।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर भाकियू के उत्तरी हरियाणा प्रभारी मेेहताब कादियान, प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान, महासचिव राजेंद्र राणा, कार्यालय सचिव राजकुमार नौतना, चांदवीर, शक्ति सिंह, बबलू सोहाना, प्रकाश शेखपुरा, कविंद्र सिंह, जोगिंद्र सांगवान, देवेंद्र सांगवान, महावीर देसवाल, तारा चंद शर्मा, कृष्ण चंद शर्मा, राजेश बैनिवाल सहित काफी संख्या में किसान मौजूद थे।
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