ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों के कैंप लगना स्वास्थ्य से खिलवाड़ - दिनेश छिक्कारा
राष्ट्रीय जंक्शन / सोनीपत ।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबद्ध सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने राज्य कमेटी के आह्वान पर छुट्टियों के दौरान आयोजित किए जा रहे प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण शिविरों और भाषा शिक्षण के नाम पर समर कैम्प का जिला प्रधान नरेंद्र चहल की अध्यक्षता में विरोध कर जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग हरियाणा के नाम ज्ञापन सौंपा।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव दिनेश छिक्कारा ने बताया कि संगठन केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करता। शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था के हित में हर निर्णय विवेक, संवाद और न्याय के आधार पर लिया जाना चाहिए। विभाग ने भीषण गर्मी के कारण बच्चों के अवकाश कर रखे हैं दूसरी और बच्चों के भाषा शिक्षा के नाम पर 1 जून से 8 जून तक समर कैंप लगा रखे हैं जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं जिसका अध्यापक संघ विरोध करता है। यह भाषा शिक्षा कार्य बच्चे के मूल पाठ्यक्रम के साथ ही भारतीय भाषा विषेशज्ञों से करवाया जाना चाहिए। इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के परामर्श, सम्मान और व्यावसायिक गरिमा को मध्यनजर रखकर करवाने चाहिए। परन्तु इस प्रकार के प्रशिक्षणों में अध्यापकों व बच्चों को अवकाश के दौरान जबरन उपस्थिति के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि सीधा-सीधा शोषण है और ऐसे में संघर्ष अवश्यंभावी हो जाता है। इसी प्रकार प्राथमिक शिक्षकों के पांच दिन का प्रशिक्षण शिविर निपुण हरियाणा मिशन के एफ एल एन के तहत कराया जाना है। अध्यापक संघ यह स्पष्ट करता है कि सेवाकालीन प्रशिक्षण शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार लाने और शिक्षण कौशल को विकसित करने के लिए आवश्यक है। किंतु वर्तमान में जो प्रशिक्षण कार्यक्रम छुट्टियों में आयोजित किए जा रहे हैं, वे सिर्फ बजट की औपचारिकता और उपस्थिति की खानापूर्ति तक सीमित होकर रह जाते हैं।ऑनलाइन उपस्थिति, पूर्व-परीक्षण, पश्चात-परीक्षण, फीडबैक टेस्ट जैसे मूल्यांकन उपकरण एक केंद्रीकृत, अविश्वासपूर्ण और गैर-रचनात्मक प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं, जो शिक्षकों की शैक्षणिक स्वतंत्रता और निर्णय क्षमता पर सीधा हमला है। इसमें सुधार कर गुणवत्ता बढ़ाने की और अध्यापक को कक्षा कक्ष के अंदर अधिक स्वतंत्रता देने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे बताया कि अन्य विभागों की तुलना में शिक्षकों के साथ भेदभाव होता आया है।शिक्षकों को अन्य विभागों की तुलना में लगभग आधे अवकाश ही मिलते हैं, और अब उन सीमित छुट्टियों में भी जबरन प्रशिक्षण थोपकर शेष अवकाश भी छीने जा रहे हैं। अन्य विभागों के कर्मचारियों को 52 शनिवार,15 से 30 अर्जित अवकाश, 20 चिकित्सा/हाफ डे तथा 4 प्रतिबंधित अवकाश मिलते हैं। इसके विपरीत, शिक्षकों को मात्र 12 द्वितीय शनिवार और 10 अर्जित अवकाश ही दिए जाते हैं। जब विभाग यह कहता है कि शिक्षकों को गर्मी व सर्दी में लंबी छुट्टियाँ मिलती हैं, तो यह एक दिखावटी संतुलन है क्योंकि यह छुट्टियाँ भी शिक्षकों के पारिवारिक, सामाजिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं होतीं, बल्कि बच्चों की अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए ‘अनिवार्य उपस्थिति-मुक्त’ होती हैं।अगर शिक्षकों को वेकेशन कर्मचारी माना जाता है, तो छुट्टियों में प्रशिक्षण थोपने का कोई औचित्य नहीं है। और अगर नॉन-वेकेशन कर्मचारी माना जाता है, तो उन्हें समान अधिकार, सुविधाएँ और नीति-सम्मत अवकाश दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी तीन प्रमुख मांगें हैं शिक्षा विभाग को नॉन-वेकेशन विभाग घोषित किया जाए, ताकि शिक्षकों को भी अन्य विभागों की भाँति सभी प्रकार के नियमित, अर्जित, चिकित्सा व अन्य अवकाश की समान सुविधा मिल सके। दूसरा यदि छुट्टियों में प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है, तो उसके बदले प्रतिपूरक अवकाश या अर्जित अवकाश नियमों के अनुसार दिया जाए तथा यदि छुट्टियाँ घोषित की गई हैं, तो शिक्षकों को उनसे वंचित करने की बजाय उनका संवैधानिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत अधिकार मानते हुए विभाग स्पष्ट नीति जारी करे।
उन्होंने कहा कि इस तरह के तुगलकी फरमानों और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ राज्य के सभी शिक्षकों से आह्वान करता है कि वे 5 जून को निदेशालय, पंचकूला पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर भाग लें, और यह स्पष्ट करें कि शिक्षक अपनी गरिमा, अधिकार और न्याय के लिए संगठित और संघर्षशील हैं।
मौके पर राज्य सचिव जोगिंदर सिंह प्रधान नरेंद्र चहल कैशियर रोहतास गंगाना,सुरेंद्र पाल, कुलदीप सिंह, ऋषिकेश , अनिल, इत्यादि उपस्थिति रहे।
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